तम्मना थी जो आपकी मेरे उगते हुए बालों को देखने की , काश ये समझ पाती कि मै तो उनकी परछाई को देखकर ही जीता हूँ |
कहते हैं वो मुझे जो खुली किताबें, शायद उन्हें पता नहीं वो अपनी उंगलियों की कशक छोड़ जाते हैं |
Advertisement
26 Saturday Nov 2011
Posted in emotion, insidevivek
तम्मना थी जो आपकी मेरे उगते हुए बालों को देखने की , काश ये समझ पाती कि मै तो उनकी परछाई को देखकर ही जीता हूँ |
कहते हैं वो मुझे जो खुली किताबें, शायद उन्हें पता नहीं वो अपनी उंगलियों की कशक छोड़ जाते हैं |