तम्मना थी जो आपकी मेरे उगते हुए बालों को देखने की ,
काश ये समझ पाती कि मै तो उनकी परछाई को देखकर ही जीता हूँ  |
 
कहते हैं वो मुझे जो खुली किताबें, शायद उन्हें पता नहीं वो अपनी उंगलियों की कशक छोड़ जाते हैं  |
 
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