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खोलता हूँ जब वो पुरानी किताबें,
मटमैले पन्नो में, सिमटी वो यादें ,
पृष्ट दर पृष्ट सरसराती उंगलियाँ मेरी,
 स्तब्ध हूँ, निशब्द हूँ मै,
 पर अनकहे शब्द कह जाती है
 खोलता हूँ जब वो पुरानी किताबें !
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